बेरोजगारी का समाधान
बेरोजगारी वर्तमान समय मे एक बहुत ही गम्भीर समस्या है। सरकार भी इसे खत्म करने के लिये हमेशा प्रयत्नशील रहती है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ने का कारण क्या है। अपने अपने तर्क पर सभी विचार रखते है कि बेरोजगारी सबसे बड़ा कारण बढ़ती जनसंख्या है लेकिन ये तर्क
कुछ स्तर तक तो ठीक है लेकिन इस बेरोजगारी बढ़ने का जो मुख्य कारण है उस पर अभी तक किसी का ध्यान ही नहीं गया बेरोजगारी बढ़ने के कई कारण हैं जैसे हमारे देश में चल रही को प्रथाएं देश में बड़े स्तर पर कुप्रथाओ ने इतना कब्जा कर रखा है कि व्यक्ति धीरे-धीरे उनको प्रथाओं में फंसता जा रहा है और बेरोजगारी का शिकार होता जा रहा है उदाहरण के तौर पर दहेज को ही ले लीजिए पिता अपनी पुत्री के विवाह में अत्यधिक पैसा खर्च करता है फिर कर्जा हो जाने पर जमीन को बेच देता है फिर बेरोजगारी की समस्या सामने खड़ी हो जाती है। क्या इनको प्रथाओं को भी देश से खत्म किया जा सकता है तथा बेरोजगारी को कम किया जा सकता है अगर हां तो कैसे आज हम विचार करेंगे कि हम देश से कथाओं को कैसे कम कर सकते हैं तथा बेरोजगारी की समस्या से कैसे बच सकते हैं वर्तमान समय में दहेज प्रथा पर सरकार ने कई कानून बनाए लेकिन उन कानूनों की पालना आम व्यक्ति नहीं कर रहा है जिससे समाज के स्वरूप में बदलाव आया है यह समस्याएं हमारी परंपरा बन चुकी है अगर हम लड़की को दहेज ना दे तो भी समाज जीने नहीं देता लेकिन अब हम इन को प्रथाओं को समाप्त करेंगे प्राचीन काल से ही भारत साधु महात्माओं का देश रहा है भारत में कई महापुरुष हुए हैं जिन्होंने समय-समय पर देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने का तथा कुप्रथा को नष्ट करने का प्रयास किया है वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज यही कार्य कर रहे हैं उनके शिष्य ना तो दहेज लेते हैं ना दहेज देते हैं जिससे बेटी भी सुखी और पिता भी सुखी संत रामपाल जी महाराज के नशे को जिससे शरीर का भी बचाव तथा धन का भी बचाव होता है अगर धन का बचा हुआ इसका मतलब बेरोजगारी कम हुई देश में चल रही अनेक प्रकार की परंपराएं भी हमारी बेरोजगारी का मुख्य कारण है जैसे शादी में अनेक प्रकार के डीजे बजाना भी समाज के लिए घातक है मृत्यु भोज में पैसा लगाने से व्यक्ति की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है कई बार सामाजिक दबाव में आकर अपनी जीविका चला रहे निर्भर किसान को अपनी जमीन को बेचना पड़ जाता है संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई समाज में यही संदेश देते हैं कि हमें मृत्यु भोज नहीं कराना चाहिए तथा शास्त्र भी इसी का प्रमाण देते हैं गरुड़ पुराण में तो यहां तक प्रमाण दिया है कि मृत्यु भोज का भोजन करने वाला सूअर बनता है तो हम क्यों ऐसा काम करें दूसरी बात विवाह कम से कम खर्चे में हो मृत्यु भोज हमेशा के लिए बंद हो दहेज प्रथा हमेशा के लिए खत्म हो अगर हम इन सब पर काबू हर लेते हैं तो मतलब हमने देश से आधी बेरोजगारी को खत्म कर दिया जब हमारे ऊपर इनको प्रथाओं का वजन ही नहीं रहेगा तो हमें फिर चिंता किस बात की दो रोटी तो खानी है वह तो सहज से मिल जाती है अगर कुप्रथाओं का वजन हमारे सर पर रहा तो व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता और ना ही सुखी हो सकता है तो हमें भी इनको कुप्रथाओं को खत्म करने में सहयोग करना चाहिए अगर आप भी सुखी जीवन जीना चाहते हैं तथा इन कुप्रथाओं को हमेशा के लिए निजात चाहते हैं तो संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताए गए नियमों को फॉलो कीजिए उनसे नाम दीक्षा लेकर भक्ति कीजिए यकीन मानिए बेरोजगारी भारत से नहीं पूरे विश्व से चली जाएगी क्योंकि संत रामपाल जी महाराज की शिष्य किसी प्रकार का नशा नहीं करते
किसी प्रकार का दहेज नहीं देते किसी प्रकार का मृत्यु भोज नहीं करते मतलब सादा जीवन जीने से बेरोजगारी खत्म हो सकती।
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